तीस हजार के बर्तन एक लाख का भुगतान।CEO व VDO की मिली भगत – ग्रा.वि.अधि. सरपंच ।
सुरेश मोमिया
झालावाड़ । संभवतया राजस्थान सरकार व पंचायती राज विभाग मदन दिलावर की भूमिका झालावाड़ जिले को छोड़कर पुरे राजस्थान प्रदेश में है।या यूं कहें की झालावाड़ जिले में लोकतन्त्र की हत्या कर राज तन्त्र चलाया जा रहा है।ग्रामीण क्षैत्रो में ग्रामीणों को सामाजिक धार्मिक या अन्य कार्यक्रमों उत्सवों में आसानी से सामग्री उपलब्ध हो इसके प्रत्येक ग्राम पंचायत में बर्तन बैंक स्थापित किये जाने जिसका कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। लेकिन भ्रष्टाचार पीछा नहीं छोड़ रहा है। जो बर्तन घोटाला सामने आया है उसमें करीब सत्तर फीसदी घोटाला सामने आया है यह मामला हम उजागर नहीं कर रहे बल्कि स्वयं सरपंच सचिवों की जुबानी है। अब डर इस बात का है कि जांच होगी तो भ्रष्टाचारी बचेंगे ओर लपटें में सरपंच सचिव आयेंगे क्योंकि टाइट अनटाइट फंड से जो भुगतान हो रहा है वो सरपंच सचिव के हस्ताक्षर से हो रहा है।नाम नहीं बताने की शर्त पर सरपंचों सचिवों ने बताया बर्तन खरीद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी व विकास अधिकारीयों का दवाब है उनके इशारे पर बर्तन खरीदे जा रहा है तथा वित्तीय आयोग फंड से भुगतान करना पड़ रहा है। उन्हीं के अनुसार बर्तन तीस हजार से ज्यादा के नहीं हैं। हालांकि अभी झालावाड़ जिले की 254 ग्राम पंचायतों में से कुछ ही ग्राम पंचायतो बर्तन बैंक में बर्तन आये है। लेकिन एक ग्राम पंचायत में सत्तर हजार रुपए का घोटाला करीब दो करोड़ रुपए का घोटाला केवल झालावाड़ में होना है।नाम नहीं बताने की शर्त पर एक ग्राम विकास अधिकारी ने बताया दो कटोरी एक थाली एक चम्मच व एक गिलास का सेट की किमत करीब 113 रुपये प्रति सेट है चार सौ सेट की किमत 45200 रुपये होती है। जिसमें भी पुरी सामग्री नहीं खरीदा गई है।इसको ग्राम विकास अधिकारीयों ने स्वयं ने बताया है कूल तीस हजार रुपए की सामग्री आ रही है। शेष राशि विकास अधिकारी के माध्यम से सीईओं तक जा रही है। निश्चित रूप से पचायत राज मंत्री की योजना है सीईओं व सभी विकास अधिकारीयों को हटाकर शासन सचिव किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करना चाहिए। किन्तु झालावाड़ में तो कम से कम मदन दिलावर की हिम्मत नहीं है । तो जांच होना भी संभव नहीं है। जांच भी हो जायेगी तो ग्राम विकास अधिकारी व सरपंच दोषी होंगे। लेकिन इन अधिकारियों को हटा कर जांच हो तो घोटाले की परतें खुल सकती है।





