- कोटा के कनिष्क को दिल्ली एम्स में मिली मुस्कान, जटिल बोन ग्राफ्ट सर्जरी सफल हुई.
कोटा। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और सामाजिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स अस्पताल में सामने आया, जहां कोटा राजस्थान के शिवपुरा निवासी रविशंकर के पुत्र 12 वर्षीय कनिष्क की जटिल बोन ग्राफ्ट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह सर्जरी न केवल चिकित्सा दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रही बल्कि साहस, विश्वास और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी बन गई। कनिष्क लंबे समय से ऊपरी जबड़े की हड्डी की कमी की समस्या से जूझ रहा था। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अत्यंत जटिल प्रक्रिया अपनाते हुए कूल्हे की हड्डी से बोन निकालकर जबड़े में प्रत्यारोपित की। बच्चों में इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है क्योंकि चेहरे की संरचना, दंत विकास और भविष्य की प्लास्टिक सर्जरी की सफलता इसी चरण पर निर्भर करती है। लगभग चार घंटे तक चली इस सर्जरी को चिकित्सकों ने सटीक योजना और आधुनिक तकनीक से सफलता तक पहुंचाया।
सबसे जटिल और निर्णायक ऑपरेशन बोन ग्राफ्ट :
एम्स के दंत एवं मैक्सिलोफेशियल विभाग की हेड डॉ. रितु दुग्गल के नेतृत्व में डॉ. राहुल यादव, डॉ. राजीव, डॉ. सेलम्बस, डॉ. एमन नाज, डॉ. हर्षित सहित विशेषज्ञ टीम तथा समर्पित नर्सिंग स्टाफ ने कनिष्क की सर्जरी और पोस्ट ऑपरेटिव केयर में विशेष भूमिका निभाई। केयर यूनिट में निरंतर निगरानी और विशेषज्ञ देखभाल के कारण कनिष्क की रिकवरी अपेक्षा से अधिक सकारात्मक रही। चिकित्सकों के साथ कनिष्क का मुस्कुराता हुआ चित्र इस ऐतिहासिक सफलता का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है। यह ऑपरेशन कनिष्क की अब तक हुई चार सर्जरी में सबसे जटिल और निर्णायक माना गया। भविष्य में अंतिम चरण में प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी, जिससे चेहरे की बनावट पूर्ण रूप से संतुलित हो सकेगी। पूरे उपचार के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संवेदनशील सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन परिवार के लिए बड़ी शक्ति बना। उनके प्रयासों से चिकित्सा प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ी और परिवार को विश्वास मिला कि कठिन से कठिन उपचार भी संभव है। कनिष्क के पिता रविशंकर ने भावुक होकर कहा कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उनके बेटे के जीवन की नई शुरुआत है। कनिष्क जन्मजात कटे होंठ तालू की गंभीर समस्या से जूझ रहा था, अब उसे बड़ी राहत प्राप्त हुई है। एम्स के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, कर्मचारियों और सभी शुभचिंतकों का आभार, समाज की दुआओं एवम् चिकित्सकों की मेहनत ने कनिष्क के चेहरे पर नई मुस्कान लौटा दी है। आज कनिष्क स्वस्थ है, आत्मविश्वास से भरा है और जल्द ही कोटा लौटने की तैयारी में है। कनिष्क की मुस्कान अब केवल एक बच्चे की खुशी नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और विश्वास की ऐतिहासिक पहचान बन चुकी है।





