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पंचायत समिति खैराबाद BDO के ‘जिला स्तरीय पुरस्कार’ पर उठने लगी भ्रष्टाचार की आंच!

On: January 29, 2026 7:38 PM
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पंचायत समिति खैराबाद सम्मान या सवालों का घेरा?

रामगंजमंडी। पंचायत समिति खैराबाद के विकास अधिकारी समयसिंह मीणा को हाल ही में जिला स्तर पर मिले सम्मान ने क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ प्रशासन उनकी पीठ थपथपा रहा है, दूसरी ओर राजनैतिक हलकों और बुद्धिजीवियों द्वारा इस चयन पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि जिस कार्यकाल को ‘आदर्श’ बताकर पुरस्कृत किया गया, उसकी बुनियाद में कथित अनियमितताओं, श्रम कानूनों के उल्लंघन और वित्तीय अराजकता की लंबी फेहरिस्त दबी हुई है।

नरेगा नियमों की ‘कथा’: मजदूरों से निजी आयोजनों में काम लेने के आरोप

सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में आयोजित ‘श्रीराम कथा गो महोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों में नरेगा श्रमिकों और पंचायत सचिवों को उनके मूल सरकारी दायित्वों से हटाकर तैनात किया गया। नरेगा अधिनियम के तहत श्रमिकों से केवल सार्वजनिक विकास कार्य ही कराए जा सकते हैं । सवाल यह है कि यदि श्रमिक सरकारी थे और सफाई रीको इंडस्ट्रियल एरिया की हो रही थी, तो इस आयोजन का श्रेय निजी तौर पर क्यों लिया गया? आरोप है कि BDO ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी मशीनरी का उपयोग निजी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए होने दिया।

स्वच्छता मिशन: कागजों पर ‘चमक’ या करोड़ों की बंदरबांट?

स्वच्छता अभियान के नाम पर खैराबाद पंचायत समिति को आवंटित करोड़ों रुपयों के वास्तविक उपयोग पर सवालिया निशान हैं। आरोप है कि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था बदहाल होने के बावजूद भुगतान पूरे कर दिए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह राशि विकास के बजाय कथित ‘आपसी तालमेल’ की भेंट चढ़ गई।

श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन, सफाई कर्मी शोषण के शिकार

ग्राम पंचायतों में दिए गए सफाई ठेकों में श्रम कानूनों के तहत पीएफ और ईएसआई लागू होना अनिवार्य है, लेकिन खेराबाद पंचायत समिति में इन नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सफाई ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों को पीएफ-ईएसआई से वंचित रखा जा रहा है और बीडीओ की ओर से कोई प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही।

खीमच पंचायत: नियमों को ठेंगा, चहेती फर्म पर

मेहरबानीवित्तीय शुचिता पर सबसे बड़ा सवाल खिमच ग्राम पंचायत के टेंडर को लेकर है। टेंडर की अवधि समाप्त होने और डीडी (DD) जमा करने की अंतिम तिथि निकलने के बाद भी एक विशेष फर्म को ठेका दिया गया। इसकी शिकायत पंचायती राज विभाग में लंबित है, जो पारदर्शी प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

ब्लैकलिस्टेड फर्म पर ‘विशेष’ अनुकंपा

हैरानी की बात है कि ‘भारती लेबर सप्लायर्स फर्म’ को ब्लैकलिस्ट करने और उसकी अमानत राशि जब्त करने के आदेश के बावजूद वह खेराबाद में काम करती रही। 12 पंचायतो में ठेके चलते रहे,बाद में जिला परिषद आयुक्त के कड़े रुख के बाद ही उसे हटाया गया। सवाल यह है कि एक प्रतिबंधित फर्म को संरक्षण किसके इशारे पर मिल रहा था?

श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन, सफाई कर्मी शोषण के शिकार

ग्राम पंचायतों में दिए गए सफाई ठेकों में श्रम कानूनों के तहत पीएफ और ईएसआई लागू होना अनिवार्य है, लेकिन खेराबाद पंचायत समिति में इन नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सफाई ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों को पीएफ-ईएसआई से वंचित रखा जा रहा है और बीडीओ की ओर से कोई प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही।

12 जगहों के सफाई ठेके ब्लैकलिस्ट फर्म को दे दिए गए थे टेंडर ‘

भारती लेबर सप्लायर्स फर्म’ को ब्लैकलिस्ट किए जाने और उसकी जमा राशि जब्त करने के आदेश के बावजूद, वह फर्म खेराबाद पंचायत समिति में काम करती रही, बाद में जिला परिषद आयुक्त के विशेष दबाव में ब्लैकलिस्ट फर्म को हटाया गया।

सूचना अधिकार की खिल्ली उड़ाई

अतिरिक्त मुख्य आयुक्त हर्षित वर्मा ने 2 मई 2025 को खैराबाद के खंड विकास अधिकारी (BDO) समय सिंह मीणा को सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे, आवेदक राशि जमा करवा चूका है फिर भी सूचना नहीं दी गईं, दें भी कैसे भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है.

कूलर खरीद में अनियमित भुगतान

ग्राम पंचायतो में गर्मी के मौसम में लगाए गए कूलर खरीद में नियम विरुद्ध अनियमित भुगतान कर दिया गया, यह मामला सोशल मिडिया अखबारों में चर्चित रहा, लेकिन इसकी निष्पक्ष चांज आज भी संदेह के घेरे में है .

प्रशासनिक मौन और ACB की भूमिका

इन तमाम प्रकरणों की शिकायतें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में लंबित हैं। इसके बावजूद कार्रवाई के बजाय ‘सम्मान’ मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है।उपरोक्त समाचार सूत्रों से प्राप्त जानकारी, लंबित शिकायतों और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव है। “इस संबंध में विकास अधिकारी समयसिंह मीणा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। उन्होंने फोन उठाना उपयुक्त नहीं समझा”

VIJAY SAMDARSHI

हेलो दोस्तों मैं 2019 से पत्रकारिता जगत में कार्य कर रहा हूं जिसमें सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म जैसे फेसबुक,यूट्यूब, इंस्टाग्राम,वेब पोर्टल वह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हिंदी दैनिक दो गज दूरी समाचार पत्र प्रकाशित करता हूं।हमारी संस्था का सिर्फ एक ही मकसद है कि हम आप तक सही और सटीक जानकारी पहुंचा देने का प्रयास करें।

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