आय प्रमाण पत्र न मिलने से गरीब बच्चों का भविष्य दांव पर
रामगंजमंडी। एक ओर शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सरकार 25% सीटों पर निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर रामगंजमंडी नगरपालिका क्षेत्र में पात्र गरीब परिवार आय प्रमाण पत्र के अभाव में आवेदन तक नहीं कर पा रहे।सरकार ने स्पष्ट प्रावधान किया है कि वार्षिक आय 2,50,000 रुपये तक वाले परिवार इस योजना के पात्र हैं। लेकिन जब आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत अधिकारी ही उपलब्ध न हों, तो यह अधिकार कागजों तक सीमित होकर रह जाता है।

“शिक्षा का अधिकार मिला, पर आय कौन तय करे?”
नगर क्षेत्र के अभिभावक इन दिनों स्कूल, अस्पताल, तहसील और अन्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।शिक्षक कहते हैं “हम आय प्रमाणित करने के लिए अधिकृत नहीं।”चिकित्सक कहते हैं “इलाज करें या आय का हिसाब रखें?”अन्य अधिकारी हस्ताक्षर से इंकार कर रहे हैं।जब आय प्रमाण पत्र ही जारी नहीं होगा तो RTE के तहत प्रवेश कैसे संभव होगा?
कानूनी सवाल है प्रशासनिक विफलता या अधिकारों का हनन?
कानूनी दृष्टि से यह स्थिति गंभीर है।शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत मौलिक अधिकार है।यदि प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में पात्र बच्चों को आवेदन से रोका जाता है, तो यह उनके संवैधानिक अधिकार का अप्रत्यक्ष हनन माना जा सकता है।सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि नागरिक की मजबूरी।नगरपालिका बोर्ड भंग होने के कारण जनप्रतिनिधि उपलब्ध नहीं हैं। वहीं राजपत्रित अधिकारी आय प्रमाणित करने से बच रहे हैं। परिणामस्वरूप गरीब परिवार दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।
OBC वर्ग पर दोहरी मार
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के परिवारों को हर वर्ष जाति के साथ आय प्रमाण पत्र भी बनवाना पड़ता है। पुराना आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और जनाधार कार्ड दिखाने के बावजूद अधिकारी प्रमाणन से इंकार कर रहे हैं। इससे सबसे अधिक नुकसान उन्हीं परिवारों को हो रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
नगरपालिका क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि नगरपालिका क्षेत्र में आय प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत अधिकारी की तत्काल नियुक्ति हो
RTE आवेदन अवधि में विशेष शिविर लगाकर आय प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।पूर्व जारी आय प्रमाण पत्र या स्व-घोषणा पत्र को अस्थायी रूप से मान्य किया जाए।आवेदन तिथि में आवश्यक विस्तार किया जाए।यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
उपखण्ड अधिकारी चारु वर्मा ने कहा है
नगरपालिका अधिशासी अधिकारी से जानकारी लेकर शीघ्र ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिससे जरूरतमंदों को भटकना न पड़े। लेकिन प्रश्न यह है कि जब तक व्यवस्था बनेगी, तब तक आवेदन की अंतिम तिथि निकल गई तो जिम्मेदार कौन होगा?
नगरपालिका क्षेत्र में आय प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत अधिकारी की तत्काल नियुक्ति की मांग
पीड़ित अभिभावकों ने मांग की है कि RTE आवेदन अवधि में विशेष शिविर लगाकर आय प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।पूर्व जारी आय प्रमाण पत्र या स्व-घोषणा पत्र को अस्थायी रूप से मान्य किया जाए।आवेदन तिथि में आवश्यक विस्तार किया जाए।यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।





