धौलपुर .राजस्थान हाईकोर्ट ने बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आम नागरिकों और खाताधारकों के हित में अहम निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश आनंद शर्मा की बेंच ने धौलपुर निवासी रितिक सिसोदिया के बैंक खाते को अनफ्रीज करने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल सिंह चौधरी ने पैरवी की। मामला साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खाते को पूरी तरह फ्रीज किए जाने से जुड़ा था। अधिवक्ता राहुल सिंह चौधरी के अनुसार, याचिकाकर्ता के बैंक खाते में महज 1,596 रुपये की विवादित राशि होने के बावजूद बैंक खाते में जमा पूरी रकम पर रोक लगा दी गई थी। जिस खाते को फ्रीज किया गया, उसमें करीब 83 हजार रुपये जमा थे। ऐसे में विवादित राशि और खाते में उपलब्ध कुल रकम के बीच काफी अंतर होने के कारण पूरे खाते को फ्रीज किए जाने से खाताधारक को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
विवादित राशि कम होने पर पूरे खाते को फ्रीज करने पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया कि यदि किसी बैंक खाते में साइबर अपराध से संबंधित कोई सीमित या संदिग्ध राशि पाई जाती है और उस राशि की पहचान स्पष्ट रूप से की जा सकती है, तो केवल उस राशि को सुरक्षित रखने के बजाय पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देना खाताधारक के लिए गंभीर आर्थिक कठिनाई पैदा कर सकता है। अधिवक्ता राहुल सिंह चौधरी ने बताया कि साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों पर रोक लगाने की कार्रवाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन ऐसी कार्रवाई करते समय आम नागरिकों और व्यापारियों के हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति के खाते में यदि बड़ी रकम मौजूद है और विवाद केवल छोटी राशि को लेकर है, तो पूरे खाते को प्रतिबंधित करने से खाताधारक अपनी वैध रकम का इस्तेमाल भी नहीं कर पाता।
हाईकोर्ट ने दिया संतुलित कार्रवाई का निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में राहत प्रदान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यदि संदिग्ध या विवादित लेन-देन की राशि स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकती है, तो पूरे बैंक खाते को फ्रीज करने के बजाय संबंधित राशि पर ही लीन या होल्ड लगाया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर साइबर अपराध से संबंधित संदिग्ध रकम को सुरक्षित रखना है, वहीं दूसरी ओर खाताधारक की उस रकम को इस्तेमाल करने की सुविधा बनाए रखना है, जिसका विवादित लेन-देन से कोई संबंध नहीं है।
आम खाताधारकों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण आदेश
हाईकोर्ट के इस आदेश को उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके बैंक खातों पर साइबर अपराध से जुड़ी जांच के दौरान रोक लगा दी जाती है। कई मामलों में खाते में मौजूद पूरी रकम का इस्तेमाल बंद हो जाने से व्यक्ति को रोजमर्रा के खर्च, व्यापारिक भुगतान, कर्मचारियों के वेतन, बैंक की किस्तों और अन्य जरूरी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है। विशेष रूप से छोटे कारोबारियों के लिए बैंक खाते का पूरी तरह फ्रीज होना उनके कारोबार के संचालन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि विवादित राशि सीमित और स्पष्ट रूप से चिन्हित है, तो केवल उस राशि पर रोक लगाने की व्यवस्था खाताधारक और जांच एजेंसी—दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकती है।
साइबर अपराध की जांच भी रहेगी जारी
हाईकोर्ट के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि साइबर अपराध से संबंधित जांच पर रोक लग जाएगी। संदिग्ध लेन-देन की जांच संबंधित एजेंसियां जारी रख सकती हैं। अदालत के निर्देश का प्रमुख पहलू यह है कि जहां विवादित राशि स्पष्ट रूप से निर्धारित की जा सकती है, वहां जांच के उद्देश्य से आवश्यक राशि को सुरक्षित रखते हुए खाते की शेष वैध रकम को अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित न किया जाए।
1,596 रुपये की राशि के विवाद में 83 हजार रुपये का खाता हुआ था फ्रीज
इस मामले में याचिकाकर्ता के अनुसार, बैंक खाते में करीब 83,000 रुपये जमा थे, जबकि विवादित राशि केवल 1,596 रुपये थी। विवादित रकम की तुलना में खाते में उपलब्ध राशि काफी अधिक होने के बावजूद पूरा खाता फ्रीज कर दिया गया था। हाईकोर्ट के समक्ष इसी परिस्थिति को चुनौती दी गई। अदालत के आदेश के बाद याचिकाकर्ता को राहत मिली और बैंक खाते को अनफ्रीज करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि संदिग्ध लेन-देन की राशि यदि स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकती है तो उस पर लीन अथवा होल्ड लगाया जा सकता है।
आदेश से निकला अहम संदेश
राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश से यह संदेश सामने आता है कि साइबर अपराध की रोकथाम और जांच जरूरी है, लेकिन कार्रवाई करते समय खाताधारक के वैध धन और उसके आर्थिक हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। विवादित रकम छोटी और स्पष्ट रूप से चिन्हित होने की स्थिति में पूरे बैंक खाते को फ्रीज करने के बजाय संबंधित राशि पर रोक लगाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। मामले में याचिकाकर्ता रितिक सिसोदिया की ओर से अधिवक्ता राहुल सिंह चौधरी ने पैरवी की। हाईकोर्ट के निर्देश से बैंक खाता फ्रीज होने के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करने वाले खाताधारकों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





