धांसूपुर की सियासत में दागी जी’ किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वैसे तो जितना काला कोयला होता है, उससे ज़्यादा काला इनका मन है। आम इंसान की सनक तो चंद घंटों में उतर जाती है, लेकिन जब दागी जी के दिमाग का पेंच हिलता है, तो बड़े-बड़े वैज्ञानिकों की लेबोरेटरी भी फेल हो जाती है। सोचती होंगी कि ऐसा दिमागी वायरस दुनिया में आया कहाँ से!चाल-चेहरा तो इनकी हरकतों की बारात का जीवंत नमूना है, और चरित्र का आलम यह है कि “जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद नहीं करते, बल्कि पूरा डाइनिंग टेबल ही गायब कर देते हैं!”बाज़ार में गर्म हवाओं के साथ एक गुप्त ख़बर तैर रही है कि दागी जी को हस्तिनापुर के गुप्त तहखाने से राजनीतिक पार्टी को ‘ससम्मान नेस्तनाबूद’ (डुबाने) का ठेका मिला हुआ है!यहाँ जनता से पूछने, कार्यकर्ताओं की राय लेने या लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने की कोई ज़रूरत नहीं समझी जाती सीधा आलाकमान से पार्टी सफाचट करने का टेंडर दागी जी के नाम पर पास हो जाता है। दागी जी की प्रजाति बड़ी दुर्लभ है। ये पार्टी की किसी मीटिंग, संघर्ष या आंदोलन में कभी धूल फांकते नज़र नहीं आएंगे। इनका नियम पक्का है , बरसात आते ही जैसे मेंढक बिल से निकलकर टर्राने लगते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे ही चुनावी समर का बिगुल बजता है, दागी जी अचानक प्रकट हो जाते हैं। और जैसे ही चुनाव ख़त्म और नतीजे आए दागी जी मिस्टर इंडिया की तरह ऐसे ग़ायब होते हैं कि ज़मीन निगल गई या आसमान खा गया!खुदा जाने दागी जी को कौन सी राजनीतिक मिर्गी का दौरा पड़ता रहता है , पहले इन्होंने एक बुज़र्ग का अपमान कर अपनी महानता दिखाई। फिर थोड़े दिन बाद दूसरे बुज़र्ग का सरेआम अनादर किया।लेकिन दोनों के बाप का अपमान होने के बाद भी दागी जी की शरण में है। अब तो हद ही पार हो गई अभी हाल में पार्टी के सबसे वफ़ादार, कर्मठ, सेवाभावी और ईमानदार नेता जो रात-दिन पार्टी की चौखट पर माथा टेकते हैं उन्हें ही एक झटके में ‘फ़र्ज़ी’ करार दे दिया!अरे भाई! इसे ही तो कहते हैं सौ चूहे खाकर बिल्ली हज़ को चली। दागी जी ख़ुद तो दूध के धुले ऐसे हैं जैसे कोई पाखंडी संत, जबकि सच्चाई यह है कि वे ‘खाटी छाछ’ हैं, ऐसी मट्ठा जिसका रायता भी नहीं बन सकता, और जो केवल सिर्फ़ नाली में फेंकने या बर्तन माँजने के काम आती है!इनकी इन उल्टी-पुल्टी कारगुजारियों को देखकर तो अब धांसू पुर की जनता और दीवारों के कान भी यही फुसफुसा रहे हैं:ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर… दागी जी तो इस बार धांसू पुर की महारानी को सिंहासन से हटाकर ही दम लेंगे!दागी जी पार्टी को पूरी तरह रसातल में पहुँचाकर हस्तिनापुर का टेंडर पूरा करते हैं, या धांसू पुर की महारानी उन्हें चुनावी भंवर में ऐसा गोता खिलाती है कि वो जीवनभर राजनीतिक में तैरना भूल जाएँ!
घूमता आईना: धांसूपुर के दागी जी, पार्टी डुबाने का सुपारी-स्पेशलिस्ट टेंडर!
On: October 15, 2026 1:30 AM
---Advertisemant---





