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झालावाड़ में 14 हज़ार रुपए किलो का हलवा डकार गए साहेब!ग्राम पंचायत देवली चंचल का मामला।

On: October 3, 2026 6:51 AM
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सरकारी दामादों के ‘शाही’ पेट और कागजी पपड़ी ।

झालावाड़। अंधेर नगरी, चौपट राजा वाली कहावत तो आपने बचपन से ही सुनी होगी, लेकिन भ्रष्टाचार के नित-नए कीर्तिमान गढ़ने में मशहूर हमारे झालावाड़ जिले ने इस मुहावरे को भी ‘अपग्रेड’ कर दिया है। यहाँ अब केवल चौपट राजा नहीं हैं, बल्कि पंचायत का खजाना दोनों हाथों से लुटाने वाले ऐसे सरकारी दामाद भी विराजमान हैं, जिनके शाही ठाठ-बाठ के आगे मुग़ल सल्तनत के शाहज़ादे भी पानी भरते नज़र आएँ।देश के बड़े से बड़े नामी मिष्ठान भंडारों को भुला दीजिए, जहाँ काजू कतली या केसर पिस्ता की मिठाइयाँ भी चंद सौ या हज़ार रुपए किलो में सिमट जाती हैं।

झालावाड़ में 14 हज़ार रुपए किलो का हलवा डकार गए साहेब!

असली स्वाद तो झालावाड़ जिले के चुरेलिया कस्बे के एक साधारण से राजेश रेस्टोरेंट की मिठाई में है! इकलेरा की ग्राम पंचायत ‘देवली चंचल’ के ग्राम विकास अधिकारी शिवेंद्र शर्मा और सरपंच महोदय की मेहरबानी से यहाँ कागजों पर ऐसी जादुई और अलौकिक मिठाई पकी, जिसकी कीमत पूरे 14,000 रुपए प्रति किलोग्राम तय की गई।जी हाँ, आँखें मलने की ज़रूरत नहीं है! 26 जनवरी 2020 को गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मासूम बच्चों के मुँह में मिठास घोलने के नाम पर पूरे 5 किलोग्राम मिठाई खरीदी गई। बिल नंबर 165 दिनांक 27/01/2020 पर अंकित यह ‘अमृत तुल्य’ मिठाई कुल 70,000 रुपए में पड़ी, और जुलाई 2020 में सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी के शाही हस्ताक्षरों के साथ पंचायत के खजाने से इसका भुगतान भी ‘हँसते-हँसते’ निपटा दिया गया।कहावत है कि “चोर की दाढ़ी में तिनका”, लेकिन यहाँ तो पूरा का पूरा बरगद का पेड़ ही छुपा हुआ है! कमाल की बात यह है कि इस ग्राम पंचायत की एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार ऑडिट हो चुकी है। मगर बलिहारी हो उन ऑडिट अधिकारियों की पारखी नज़र की, जिन्हें 140रुपए किलो वाले हलवे या साधारण मिठाई के बिल में छुपा 14,000 रुपए का यह ‘महा-घोटाला’ नज़र ही नहीं आया! मानों ऑडिट करने वाले साहेब भी चुरेलिया की उसी ‘अलौकिक मिठाई’ की खुमारी में सोए हुए थे।जनता पानी, बिजली और टूटी सड़कों के लिए तरसती रहे, लेकिन जब बात कागजी विकास की आती है तो झालावाड़ जिला हमेशा ‘अव्वल’ नंबर पर बाजी मार लेता है। “घर में नहीं दाने, अम्मा चलीं भुनाने” वाली तर्ज पर पंचायत का खजाना ऐसे लुटाया जा रहा है जैसे बापू की बपौती हो। मासूम बच्चों को गणतंत्र दिवस पर 14 हज़ार रुपए किलो की मिठाई खिलाने का यह कागजी नाटक दरअसल भ्रष्टाचार का वह नग्न नाच है, जिसे देखकर पूरा जिला सन्न रह गया है।

अब सवाल बड़ा है?

क्या इस सीधे-सीधे गबन और धांधली पर विकास अधिकारी महोदय कोई ठोस गाज़ गिराएंगे? या फिर हमेशा की तरह रात गई, बात गई मानकर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में दबाने का प्रयास होगा?लेकिन साहेब, याद रखिएगा — जनता सब देख रही है और इस बार यह ‘जीवती मक्खी’ निगलना इतना आसान नहीं होगा। कागज़ों पर पकी यह 14 हज़ार वाली ‘शाही मिठाई’ अब ज़िम्मेदारों के गले की ऐसी हड्डी बनने वाली है, जिसे न उगलते बनेगा और न निगलते!मान लिया बिल पर पांच किलो ग्राम के स्थान पर 5 क्विंटल पढा जाय और हो सकता है। लेकिन 2020 में नुकती का भाव 105 रुपए किलो था और 5 क्विंटल नुकती तो नगरपालिका क्षैत्र में भी 26 जनवरी वितरण नहीं होता है। कही न कही गड़बड़ जो जाच का विषय है।

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