नाम मूंगफली का, दाम तिल्ली का. और पेट में ‘पाम ऑयल’ का तेलम-पेल!
झालावाड़। कहते हैं कि “घर का वैद्य और रसोड़े का तेल, इंसान की ज़िंदगी तय करते हैं।” लेकिन इन दिनों झालावाड़ जिले में रसोड़े का वही तेल लोगों की साँसों का तेल निकालने पर आमादा है। जिले के बाज़ारों में घटिया और मिलावटी खाद्य तेल की ऐसी विकराल बाढ़ आई हुई है कि हर गली-मोहल्ले में ‘शुद्धता’ के नाम पर खुलेआम ‘बीमारी’ परोसी जा रही है। मूंगफली, तिल्ली और सरसों के नाम पर बिकने वाले तेल की शीशी खोलिए, तो अंदर से ‘पाम ऑयल’ अपनी करारी मौजूदगी का अहसास करा देता है.अजी, स्थिति यह है कि हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या.एक लीटर के छोटे पाकिट से लेकर 15 लीटर के बड़े टीन (डब्बे) तक में बेधड़क घटिया और नकली खाद्य तेल बेचा जा रहा है। पर अफ़सोस, जिसकी लाठी में महकमे की चुप्पी का ज़ोर है, उसकी भैंस ही बाज़ार में ज़हरीला तेल बेच रही है।जिले के स्वास्थ्य भवन और खाद्य सुरक्षा विभाग का आलम यह है कि “सांप निकल गया और अब लकीर पीटने” की फुर्सत भी उनके पास नहीं है। जिस महकमे का काम जनता की सेहत की रखवाली करना था, वही आज ‘गांधारी और धृतराष्ट्र’ की तरह आँखों पर पट्टी बाँधे बैठा है.
बड़ा सवाल:-
क्या स्वास्थ्य भवन को बाज़ारों में तैरता यह ज़हरीला तेल दिखाई नहीं दे रहा, या फिर “दुधारू गाय की लात सहने” की पुरानी आदत के चलते साहब लोगों के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही?लोग बाज़ार से तेल नहीं, बल्कि पेट दर्द, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का राशन घर ला रहे हैं। ऐसा लगता है मानो झालावाड़ का स्वास्थ्य महकमा जनता की सेहत सुधारने नहीं, बल्कि बीमारियों का ज़हरीला लंगर बाँटने के लिए ‘कुंभकर्णी नींद’ सो रहा है।डब्बे पर चमचमाती मूंगफली और सरसों की तस्वीर है, पर अंदर केवल सस्ता और घटिया पाम ऑयल 1 लीटर के पाउच से लेकर 15 लीटर के टीन तक, हर साइज़ में मिलावट का यह ‘अमृत’ पूरी गारंटी के साथ उपलब्ध है। जाके पाँव न फटे बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई! आम आदमी महँगाई के मारे पिस रहा है और बदले में उसे शुद्धता के नाम पर धीमा ज़हर दिया जा रहा है।”दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है”, लेकिन यहाँ तो रोज़ाना हज़ारों लीटर ज़हरीला तेल लोगों की आंतों में उतारा जा रहा है और ज़िम्मेदार अफ़सर दफ़्तरों के एसी कमरों में ‘सब चंगा सी’ की ताली बजा रहे हैं। अगर समय रहते इन मिलावटखोरों और ज़हर के सौदागरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो झालावाड़ का हर दूसरा घर अस्पताल का चक्कर लगाने को मजबूर होगा।अब देखना यह है कि सोता हुआ स्वास्थ्य प्रशासन कब नींद से जागकर इन मिलावटखोरों पर अपनी ‘कानूनी लाठी’ चलाता है, या फिर झालावाड़ की जनता यूँ ही तेल के इस ज़हरीले खेल में पिसती रहेगी.





