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खानपुर में अंत्योदय श्रेणी घोटाले की परतें खुलने का इंतजार कब तक !

On: October 5, 2026 5:32 AM
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ई-मित्र से लेकर राशन डीलर तक जांच के घेरे में?

गरीब उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूलकर सरकारी आईडी के दुरुपयोग का आरोप

रसद विभाग ने अपात्रों के राशन कार्ड बंद कर गुपचुप गेहूं की वसूली शुरू की…… लेकिन असली बिचौलियों तक पहुंचने के लिए रसद विभाग व साइबर क्राइम टीम द्वारा उपभोक्ताओं के बयान जरूरी

खानपुर/झालावाड़। खाद्य सुरक्षा योजना में कथित अनियमित तरीके से लाभार्थियों की श्रेणी बदलकर अंत्योदय में शामिल किए जाने का मामला गर्मा कर अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार, राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों सहित झालावाड़ जिले की खानपुर तहसील में पिछले एक-दो वर्षों के दौरान कुछ ई-मित्र संचालकों द्वारा स्थानीय सक्षम अधिकारियों की शासकीय आईडी का कथित रूप से दुरुपयोग कर खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की श्रेणी में परिवर्तन कर दिया गया। इससे ऐसे लोगों को भी अंत्योदय श्रेणी का लाभ मिलने की आशंका है, जो वास्तव में निर्धारित पात्रता के अनुसार इसके हकदार नहीं थे इस पूरे मामले में सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगा है ।इस मामले में जिला रसद विभाग, झालावाड़ तथा पुलिस और साइबर क्राइम टीम द्वारा जांच किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। वहीं, रसद विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से अपात्र पाए गए कुछ लाभार्थियों के राशन कार्ड बंद करने तथा कथित रूप से गलत तरीके से प्राप्त किए गेहूं की वसूली की कार्रवाई भी शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।लेकिन इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी आईडी का दुरुपयोग हुआ और अपात्र लोगों की श्रेणी बदली गई, तो इस प्रक्रिया के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे?

गरीब ग्रामीणों को लालच देकर मोटी रकम वसूलने का आरोप

ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक गरीब और अशिक्षित परिवार सरकारी योजनाओं की ऑनलाइन प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ऐसे परिवार अक्सर राशन डीलर, ई-मित्र संचालक या किसी परिचित व्यक्ति की सहायता से अपने दस्तावेजी कार्य करवाते हैं। इसी परिस्थिति को देखते हुए, इस मामले में भी कुछ स्थानीय राशन डीलरों की संभावित भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोपों के अनुसार, कुछ ग्रामीण उपभोक्ताओं को अंत्योदय श्रेणी में शामिल करवाने का लालच दिया गया और उनसे कथित रूप से मोटी रकम लेकर ई-मित्र संचालकों के माध्यम से श्रेणी परिवर्तन करवाया गया।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है और किसी भी राशन डीलर या ई-मित्र संचालक की भूमिका जांच में साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।

सरकारी आईडी तक पहुंच कैसे बनी?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू सरकारी अधिकारियों की यूजर आईडी के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। यदि किसी सक्षम अधिकारी की आईडी से लाभार्थियों की श्रेणी बदली गई, तो जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि:- संबंधित आईडी से लॉगिन किस समय और किस स्थान से किया गया?- श्रेणी परिवर्तन किस उपकरण या आईपी एड्रेस से हुआ?- आवेदन किस ई-मित्र केंद्र से तैयार या संचालित किए गए?- क्या किसी अधिकारी की जानकारी या अनुमति के बिना आईडी का उपयोग हुआ?- लाभार्थियों के दस्तावेज और ओटीपी किस व्यक्ति ने इस्तेमाल किए?- एक ही ई-मित्र केंद्र या लॉगिन से कितने संदिग्ध परिवर्तन किए गए?इन सवालों के जवाब डिजिटल लॉग, आवेदन रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की जांच से सामने आ सकते हैं।

राशन कार्ड बंद, गेहूं की वसूली शुरू; लेकिन बिचौलियों का क्या?

रसद विभाग द्वारा अपात्र पाए गए उपभोक्ताओं के राशन कार्ड बंद करने और कथित रूप से दुरुपयोग किए गए गेहूं की वसूली की कार्रवाई किए जाने की जानकारी है। यह कार्रवाई योजना के संसाधनों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इससे प्रकरण का पूरा सच सामने आना आवश्यक नहीं है।यदि किसी ग्रामीण उपभोक्ता ने किसी मध्यस्थ को पैसे देकर श्रेणी परिवर्तन करवाया था, तो केवल उपभोक्ता से वसूली करने से उस मध्यस्थ की भूमिका सामने नहीं पा आएगी। जब तक संबंधित उपभोक्ताओं से स्वतंत्र रूप से पूछताछ नहीं की जाती, तब तक यह पता लगाना कठिन हो सकता है कि उन्हें किसने योजना में शामिल करवाने का भरोसा दिया, किसने रकम ली और किसके माध्यम से ई-मित्र संचालक तक संपर्क पहुंचा।

उपभोक्ताओं के बयान खोल सकते हैं कथित नेटवर्क की कड़ी

जांच में अपात्र पाए गए उपभोक्ताओं के बयान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पुलिस अथवा साइबर क्राइम टीम द्वारा स्वतंत्र वातावरण में बयान दर्ज किए जाने पर निम्नलिखित जानकारी सामने आ सकती है.

  • 1. अंत्योदय श्रेणी में शामिल करवाने का प्रस्ताव किसने दिया?
  • 2. क्या किसी राशन डीलर या अन्य व्यक्ति ने उपभोक्ता से संपर्क किया?
  • 3. श्रेणी परिवर्तन के लिए कितनी रकम मांगी या ली गई?
  • 4. भुगतान किस व्यक्ति को और किस माध्यम से किया गया?
  • 5. उपभोक्ता को किस ई-मित्र केंद्र पर ले जाया गया?
  • 6. क्या किसी व्यक्ति ने अधिकारी की आईडी से काम करवाने का दावा किया?
  • 7. क्या ऐसे अन्य ग्रामीण परिवार भी हैं, जिनसे इसी प्रकार संपर्क किया गया?इन बयानों का डिजिटल रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और ई-मित्र आवेदन से मिलान किया जाए तो कथित मध्यस्थों की भूमिका की जांच को दिशा मिल सकती है।

जांच के सामने कई अहम सवाल

– क्या अंत्योदय श्रेणी में हुए सभी संदिग्ध परिवर्तनों का तकनीकी ऑडिट किया गया है?

– क्या लाभार्थियों से किसी प्रकार की रकम वसूले जाने के आरोपों की जांच हुई है?

– क्या संबंधित ई-मित्र केंद्रों और ऑपरेटरों के रिकॉर्ड सुरक्षित किए गए हैं?- क्या संभावित मध्यस्थों की पहचान के लिए प्रभावित उपभोक्ताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं?

– क्या सरकारी आईडी के दुरुपयोग के मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई है?

– क्या जांच का दायरा केवल अपात्र लाभार्थियों तक सीमित है या पूरी प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों तक भी पहुंच रहा है?

जनहित में निष्पक्ष जांच की मांग

खाद्य सुरक्षा योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि योजना में अनधिकृत श्रेणी परिवर्तन, सरकारी आईडी का दुरुपयोग या आर्थिक लाभ के लिए किसी नेटवर्क की भूमिका प्रमाणित होती है, तो यह गंभीर प्रशासनिक एवं कानूनी विषय होगा।जनहित में यह आवश्यक है कि जांच केवल अपात्र लाभार्थियों के राशन कार्ड बंद करने और गेहूं की वसूली तक सीमित न रहे, बल्कि कथित प्रक्रिया में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच हो। प्रभावित उपभोक्ताओं के बयान, डिजिटल रिकॉर्ड, ई-मित्र केंद्रों के दस्तावेज तथा वित्तीय लेन-देन की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस प्रकरण की कड़ियों को जोड़कर वास्तविक दोषियों तक पहुंचती हैं या मामला केवल अपात्र लाभार्थियों पर कार्रवाई तक सीमित रह जाता है। यहां यह भी महत्वपूर्ण बिंदु है कि लंबे समय से एक ही पद पर आसीन अधिकारियो द्वारा जांच सम्पन्न करने से प्रशासनिक राजनैतिक दबाव के चलते जांच प्रभावित होने की पूरी पूरी संभावना व्यक्त की जा रही.यदि जयपुर मुख्यालय द्वारा गठित टीम से जांच करवाई जाएं तो दूध का दूध पानी का पानी होने में देर नहीं लगेगी

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