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झालावाड़:देवली चंचल में फर्जी बिलो का बादशाह,जे पी सोनी का लाखों का गबन।

On: October 7, 2026 4:38 AM
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जब कागज़ी फर्म बनी नोट छापने की मशीन और विकास बह गया भ्रष्टाचार की बारिश में!

झालावाड़ .कहते हैं कि भ्रष्टाचार केवल फाइलों में रेंगने वाला कोई कागज़ी कीड़ा नहीं है, बल्कि यह वह अजगर है जो आम जनता के हक़, गांव के विकास और न्याय व्यवस्था को एक सांस में निगल जाता है। जब गांव की पक्की सड़कों और पुलियाओं का बजट सीधे नेताओं और अफ़सरों की तिजोरियों का लैंडस्केपिंग करने में खर्च होने लगे, तो पहली ही बारिश में सड़कें बहती नहीं, बल्कि व्यवस्था की पोल खोलती तैरती नज़र आती हैं।

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चंद कलाकारों के महल खड़े हो गए और आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी तरस रही है।पंचायती राज विभाग के गलियारों में इन दिनों एक नया कलाकार छाया हुआ है जगदीश प्रसाद सोनी (पीओ), जिन्हें अब इलाके में फर्जी बिलों का बादशाह का तमगा दिया जा चुका है!सूत्रों और सूचना के अधिकार (RTI) से बाहर आई परतों की मानें तो ‘सरकारी संरक्षण’ की छत्रछाया में तीन शूरवीरों—सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी और पीओ जगदीश प्रसाद सोनी ने मिलकर भ्रष्टाचार की ऐसी ‘त्रिवेणी’ बहाई है कि नियम-कायदे मुंह छुपाते फिर रहे हैं। ग्राम ल्हास के नाम से राज ट्रेडर्स नाम की एक कागज़ी (फ़र्जी) फर्म अवतरित की गई। काम चाहे हुआ हो या नहीं, लेकिन इस फर्म के नाम पर करीब 600 बिल फाड़े गए और सरकारी खजाने से लाखों रुपये का गबन-महोत्सव मनाया गया। कमाल की बात तो यह है कि पंचायत में दूसरी फर्मों के अधिकृत टेंडर मौजूद थे, लेकिन उच्चाधिकारियों की ‘कृपादृष्टि’ से भुगतान केवल पीओ साहब की इस चहेती फर्म को ही होता रहा।

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आंकड़े बोलते हैं

एक ही काम, दो-दो बार दाम!RTI से मिले दस्तावेज़ गवाही दे रहे हैं कि ग्राम पंचायत देवली चंचल में सरकारी धन को किस बेफ़िक्री से बांँटा गया पिपलिया वाले महाराज के स्थान पर बाउंड्री वॉल निर्माण: बिल संख्या 302 (दिनांक 30/08/2020) के नाम पर 1,37,638 रुपए का बिल बना, जिसका भुगतान 03/10/2020 को सरपंच साहेब के दस्तखत से हो गया। लेकिन ट्विस्ट यह है कि इस पर ग्राम विकास अधिकारी (शिवेन्द्र शर्मा) के हस्ताक्षर गायब हैं! इतना ही नहीं, दरियादिली देखिए इसी बाउंड्री वॉल के नाम पर दिनांक 25/08/2020 को 2,55,000 रुपए का एक और बिल उठाकर खजाना खाली कर दिया गया। और तो और, इसी जगह समतलीकरण (सफाई-समतल) के नाम पर बिल संख्या 303 से 46,210 रुपए का एक और ‘मेवा’ चाट लिया गया।

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सामुदायिक शौचालय निर्माण (भील मोहल्ला, देवली चंचल): बिल संख्या 304 दिनांक 22/10/2020 के जरिए 1,26,000 रुपए चढ़ाए गए और 31/10/2020 को भुगतान भी हो गया।इसके बाद ‘छुटपुट खर्च’ के नाम पर बिल संख्या 341 से 34,950 रुपए और बिल संख्या 342 से 34,337 रुपए और निकाल लिए गए। इसी तरह के जादुई खेल से अकलेरा क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों में भी लगभग 600 बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई।

अब सवाल यह है: जांच कब,कार्रवाई कब?

मिलीभगत के इस महा-खेल में और कौन-कौन से ‘महानुभाव’ शामिल हैं, यह तो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) या किसी उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा।

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लेकिन जनता का सीधा सवाल है:क्या धरातल पर निर्माण कार्य हुआ भी है या सब ‘हवा-हवाई’ था सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी और पीओ के बीच इस कमीशन-केक का बंटवारा किस अनुपात में हुआ? बिना वैध टेंडर और बिना सक्षम हस्ताक्षरों के भुगतान करने वाले अदृश्य मददगार’ कौन हैं? जब तक इस ‘फर्जी बिलों के बादशाह’ और उसके संरक्षकों पर ACB का चाबुक नहीं चलेगा, तब तक विकास की फाइलें तो मोटी होती रहेंगी, लेकिन गांव की सड़कें पहली ही बारिश में बहती रहेंगी!

इनका कहना

बिना टेंडर के भुगतान किया है तो गलत है.

आदेश कुमार,विकास अधिकारी पंचायत समिति इकलेरा

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